Tuesday, October 31, 2017

Chanakya's wisdom in a few Shlokas!



सुखस्य मूलं धर्मः , धर्मस्य  मूलं  अर्थः
अर्थस्य  मूलं  राज्यं  , राज्यस्य मूलं  इन्द्रिय  जयः
इन्द्रियाजयस्य  मूलं  विनयः, विनयस्य मूलं  वृद्धोपसेवः
वृद्धोपसेवाय  विग्न्यानं , विग्न्यानेनं आत्मानं  सम्पद्येत
समपदितात्म जितात्मम  भवति, जितात्मा  सर्वार्थे  संयुज्यते

Saturday, August 12, 2017

Beatiful song by Ahmed Faraz: Ranjish hi sahi!

A beautiful song by Ahmend Faraz made immortal by Medhi Hassan Sa'b.

रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिये आ

अब तक दिल-ए-खुशफ़हम को हैं तुझ से उम्मीदें
ये आखिरी शम्में भी बुझाने के लिये आ
रंजिश ही सही...

इक उम्र से हूँ लज्ज़त-ए-गिरया से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जां मुझको रुलाने के लिये आ
रंजिश ही सही...

कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को मनाने के लिये आ
रंजिश ही सही...

माना के मोहब्बत का छुपाना है मोहब्बत
चुपके से किसी रोज़ जताने के लिए आ
रंजिश ही सही...

जैसे तुम्हें आते हैं ना आने के बहाने
ऐसे ही किसी रोज़ न जाने के लिए आ
रंजिश ही सही...

पहले से मरासिम ना सही फिर भी कभी तो
रस्म-ओ-रहे दुनिया ही निभाने के लिये आ
रंजिश ही सही...

किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से खफा है तो ज़माने के लिये आ
रंजिश ही सही...