Monday, January 12, 2015

दिल आख़िर तू क्यूँ रोता है

दिल आख़िर तू क्यूँ रोता है

जब जब दर्द का बादल छाया
जब घूम का साया लहराया
जब आँसू पलकों तक आया

जब यह तन्हा दिल घबराया
हमने दिल को यह समझाया
दिल आख़िर तू क्यूँ रोता है

दुनिया में यूँही होता है
यह जो गहरे सन्नाटे हैं
वक़्त ने सबको ही बाँटे हैं

तोड़ा गम है सबका क़िस्सा
थोड़ी धूप है सबका हिस्सा
आँख तेरी बेकार ही नम है
हर पल एक नया मौसम है

क्यूँ तू ऐसे पल खोता है
दिल आख़िर तू क्यूँ रोता है

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